संगीत साधना के सफर ने पहुंचाया बॉलीवुड : प्रेम वल्लभ

धर्मेन्द्र साहू
मुम्बई। विरासत में मिले संगीत के माहौल ने जीवन के हर रंग को खुशनुमा बना दिया। इसी संगीत की साधना का नतीजा रहा कि बॉलीवुड तक पहुंचा और अभिनय करने का मौका मिला। आगे भी प्रयास रहेगा कि अपनी विधा के माध्यम से सबका मनोरंजन कर सकूंॅ। ये बात कही फिल्म एवं टीवी कलाकार प्रेम वल्लभ ने।
बनारस के प्रसिद्व तबला वादक पं.भगवान जी पंडया के घर 22 अप्रैल 1959 को जन्में प्रेम वल्लभ कुशाग्र बु़़द्ध के धनी रहे हैं। संगीत का वातावरण परिवार में था तो पखाबज यानि मृदंग वादन के प्रति रूचि हो गई । मृदंग वादन के गुरू पं. मन्नू आचार्य और पं. सीताराम जी रहे। प्रेम वल्लभ जब 5 वर्ष के थे तब इनको वनस्थली हॉस्टल में तबला वादन करने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री पं.जवाहर लाल नेहरू ने पुरस्कृत किया और हवाई जहाज की सैर कराई।
इसके बाद तो प्रेम वल्लभ का हौंसला बढ़ता ही चला गया । फिजीलैण्ड, न्यूजीलैण्ड और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देशों में संगीत वादन करने का मौका इन्हें मिला। मृदंग वादन की स्कॉलरशिप उस समय कत्थक केन्द्र की तरफ से इन्हें मिली। चूंकि कला प्रेमी परिवार में जन्में थे तो थियेटर की तरफ भी झुकाव हो गया और प्रेम ने बनारस में पहला थियेटर शो किया अंधा युद्ध जिसे काफी सराहना मिली।
खास रिपोर्ट डॉट कॉम से बातचीत करते हुये प्रेम वल्लभ ने बताया कि उन्हें बचपन से ही संजीव कुमार की फिल्में देखना पसंद था। इसलिये अंदर छुपा कलाकार तो एक न एक दिन बाहर निकलना ही था। काका हाथरसी की फिल्म जमना किनारे करने का मौका मिला तो तुरंत हामी भर दी । इस फिल्म में भगवान कृष्ण के 16 रूपों में से एक रूप बनने का अभिनय किया। सन 1999 में धर्मेन्द्र की फिल्म डाकू भैरो सिंह में भी अच्छा रोल मिला। धर्मेन्द्र के साथ काम करना ऐतिहासिक पल रहा।
प्रेम वल्लभ के ईमानदार प्रयास का ही नतीजा रहा कि आशुतोष राणा की चर्चित फिल्म शबनम मौसी में इन्हें आशुतोष के गुरू बनने का महत्वपूर्ण रोल मिला। इसके बाद तो दूरदर्शन के कई प्रसिद्ध सीरियल पीहर, नैन्सी, मंगलसूत्र , तलाक क्यों आदि में प्रमुख भूमिकाऐं निभाईं। सहारा वन पर अश्वनी धीर के सीरियल चमचा एण्ड चीफ में भी काफी लोकप्रिय हुये। प्रसिद्ध सीरियल लापता गंज, चिड़ियाघर, नीली छतरी वाले आदि में भी प्रेम वल्लभ महत्वपूर्ण भूमिकाओं में रहे हैं।
इन दिनों प्रोडयूसर राजेन्द्र पांडेय और डायरेक्टर शैलेष श्रीवास्तव की फिल्म फैंटास्टिक दुल्हनिया की शूटिंग में प्रेम मुख्य अभिनेता के पिता की भूमिका निभा रहे हैं। ये फिल्म अवधी भाषा की पहली फिल्म है।
ऑल इंडिया रेडियो के धारावाहिक रामलीला के बैगगा्रउण्ड म्यूजिक में मृदंग वादन प्रेम बल्लभ ने लम्बे समय तक किया है। प्रेम की तीन बेटियां हैं । वे कहते हैं कि बेटियां भाग्य विधाता होती हैं। इसलिये बेटियों से उन्हें बेहद लगाव है। नये कलाकारों के लिये उनकी सीख है कि पूरी शिददत से कला की बारीकियां सीखें फिर आगे जायें अन्यथा कैमरा फेस करते ही सब उजागर हो जाता है।

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