पृथक बुंदेलखंड राज्य :- तलवार की धार पर लड़ रहा हूँ बुंदेलखंड की लड़ाई : राजा बुंदेला

पृथक बुंदेलखंड राज्य को लेकर खास रिपोर्ट डॉट कॉम की ये श्रृंखला आज श्री गणेश चतुर्थी महोत्सव के मौके पर शुरू हो रही है। इस मंच के जरिये पृथक बुंदेलखंड राज्य की प्रासंगिकता व सार्थकता पर इतिहासकार, साहित्यकार, पत्रकार, राज्य आंदोलन से जुड़े पदाधिकारियों एवं देश के विद्वान चिंतकों व मनीषियों के विचार और साक्षात्कार प्रस्तुत किये जायेंगें।
आज इस श्रृंखला के तहत बुंदेलखंड राज्य आंदोलन से लगभग दो दशक से जुड़े फिल्म अभिनेता राजा बुंदेला के विचार पेश किये जा रहे हैं। राजा बुंदेला प्रायः कई राष्ट्रीय मंचों पर बुंदेलखंड राज्य की मांग उठाते चले आ रहे हैं। बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक स्व.शंकर लाल मेहरोत्रा भैया के साथ वे कदम से कदम मिलाकर राज्य आंदोलन में सक्रिय रहे हैं।

( धर्मेन्द्र साहू )
नई दिल्ली। बुंदेलखंड राज्य के लिये लगातार आंदोलन करते चले आ रहे फिल्म अभिनेता राजा बुंदेला का मानना है कि बिना छोटे राज्य बने बुंदेलखंड का विकास संभव ही नहीं है। उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, झारखंड और गोवा जैसे छोटे राज्य आज विकास के पर्याय बने हुये हैं। उन्होंने कहाकि मैं बुंदेलखंड राज्य की लड़ाई तलवार की धार पर खड़े होकर लड़ रहा हूँ।

खास रिपोर्ट डॉट कॉम से बातचीत करते हुये राजा बुंदेला ने कहाकि सरकार को छोटे राज्यों के निर्माण को लेकर एक निश्चित पैरामीटर बनाना चाहिये । अमेरिका की आबादी आज भारत से आधी से भी कम है बावजूद इसके वहां 50 प्रांत हैं जिसकी बदौलत सम्पूर्ण अमेरिका विकास से ओतप्रोत है। वहां के प्रांतों की अपनी संस्कृति और विरासत इसीलिये कायम रह सकी है। उन्होंने कहाकि बुंदेलखंड के साथ तो ऐसा पक्षपात हुआ जो किसी के साथ नहीं हुआ । इस क्षेत्र को मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में बांटकर तबाह कर दिया गया। हालांकि राजाओं की ट्रीटी ने निर्णय लिया था कि बुंदेलखंड को अलग राज्य के रूप में जाना जायेगा। एक महीने के लिये बुंदेलखंड राज्य बना भी था और उसके मुख्यमंत्री कामता प्रसाद सक्सेना बने थे। इसकी राजधानी नौगांव बनाई गई थी।

उन्होंने बताया कि दक्षिण में अंग्रेजियत का बोलबाला रहा है और अंग्रेजी बोलने वालों से डरकर उस वक्त राजनेताओं ने हिन्दी भाषी 80 सीटें बनाकर उत्तर प्रदेश राज्य का निर्माण किया था। इसे ये मानकर बनाया कि इतनी सीटों के जरिये हम हमेशा सत्ता में काबिज रहेगें और हमारा आदमी प्रधानमंत्री बनेगा। तभी से ये बात चरितार्थ हुई कि प्रधानमंत्री बनने का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है।

उन्होंने बताया कि मेरे लिये ये तलवार की धार पर चलने वाली बात है क्योंकि यू.पी., एम.पी. और केन्द्र में बीजेपी की सरकारें हैं बावजूद इसके मैं बुंदेलखंड राज्य की मांग बुलंद किये हुये हूँ। बुंदेलखंड मेरी पहचान है, मेरी जन्मभूमि है। उन्होंने कहाकि सत्ता से लड़कर हम विकास नहीं कर सकते । अपनों को गाली देकर कुछ नहीं किया जा सकता । उन्होंने कहा कि कि सत्ता को कनवेंस करके ही राज्यों के पक्ष में निर्णय कराया जा सकता है ।

राजा बुंदेला ने कहाकि बंदूक उठाकर हिंसा के रास्ते चलकर हम कुछ नही पाना चाहते क्योकि उससे हमारे ही लोगों व देश का नुकसान होगा। बसें जलाकर हम राष्ट्र की सम्पत्ति का नुकसान नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने कहाकि उनकी लड़ाई उस मुकाम तक पहुंच गई है कि अगर अब कोई अलग राज्य बनेगा तो सबसे पहले बुंदेलखंड को ही वरीयता दी जायेगी।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहाकि अलग राज्य बनने के पर यहां आय के इतने स्रोत हैं कि बुंदेलखंड समृद्ध हो जायेगा। यहां धार्मिक और प्राकृतिक दो तरह के पर्यटन स्थल हैं। जिनसे राजस्व की काफी प्राप्ति होगी। चित्रकूट, कालिंजर, महोबा, झांसी, दतिया , ओरछा, सोनागिर, पावागिरि, देवगढ़, खजुराहो, पन्ना आदि ऐसे पर्यटन स्थल हैं जिन्हें अंग्रेजों ने भी काफी महत्व दिया । इनके जरिये पर्यटन को बढ़ाया जा सकता है। मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड वाले हिस्से में जो जंगल है वो प्राकृतिक सम्पदाओं से भरा पड़ा है। गुना, शिवपुरी वाले क्षेत्र का आम पूरी दुनिया में निर्यात होता है। बुंदेलखंड में सबसे अच्छा नीबू, मिर्च, आंवला और अदरक होता है। काला और हरा ग्रेनाईट बुंदेलखंड में पाया जाता है जो पूरी दुनिया में जाना जाता है। उन्हांने कहाकि पन्ना का डायमंड सरकारों को इतना राजस्व देता है कि जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती है। पांच साल पहले के आंकडों के मुताबिक पन्ना के हीरों से केन्द्र सरकार को 2700 करोड़ रूपये का राजस्व जबकि मध्यप्रदेश सरकार को 1400 करोड़ रूपये का राजस्व मिला। इसके अलावा फास्फोरस व गोल्ड का पता भी यहां चला है जिसपर डेनमार्क की कम्पनी सर्वे कर रही है। यहां चार जगह हम बिजली बना रहे हैं। सात नदियों का पानी यहां से बहता है । इन सब संसाधनों से हम अलग राज्य चलाने मे पूरी तरह सक्षम हैं।
उन्होंने कहाकि जब गोवा जैसा छोटा राज्य बनाया जा रहा था तब हजार तरह की बात हो रहीं थीं लेकिन आज वहां के नागरिकां की औसत आय सबसे ज्यादा है जबकि उनका आधार केवल टूरिज्म है। इसी तरह बुंदेलखंड में हजारों संसाधन हैं। हालांकि नया राज्य बनने पर पांच वर्षों तक केन्द्र सरकार 100 प्रतिशत मदद देती है।

उन्होनें कहाकि यहां के लोगों को कुछ स्वार्थी राजनेताओं ने भ्रमित किया है। जिससे वे असमंजस में आ जाते हैं कि राज्य बनेगा या नहीं । इसका कारण ये है कुछ राजनेता यहां राज्य बनाने की जिम्मेवारी ले चुके थे लेकिन सत्ता पाते ही उनके बोल बदल गये। वे बुंदेलखंड राज्य को भूल गये और ऐन वक्त पर पीछे हट गये। यदि वे ही नेता पार्लियामेंट में बुंदेलखंड राज्य की मांग को रखते तो जनता उन्हें हाथों हाथ लेती।
उमा भारती ने भी सरकार बनते ही तीन साल के अंदर राज्य बनाने की कार्यवाही की बात कही थी ! इस सवाल पर राजा ने कहाकि इस बात का जवाब तो उमाजी ही दे सकती हैं। इसको लेकर शीघ्र ही उनका उमा भारती से संवाद होगा। उन्होंने आहवान किया कि बुंदेलखंडी जहां जिस हालत में है वहीं से अपने तरीके से बुंदेलखंड राज्य की चर्चा करे ताकि राज्य निर्माण का लक्ष्य पूर्ण हो सके।

उन्होंने कहाकि प्रधानमंत्री द्वारा  देश के विकास के लिये सशक्त निर्णय लिए जा रहे हैं । बुंदेलखंड की जनता ने भी इसमें विश्वास जताया है। नतीजतन यूपी विधानसभा चुनाव में यहाँ 19 में से 19 सीटों पर जनता ने बीजेपी को जिताया है । ऐसे में मुझे पूरा भरोसा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुन्देलखंडवासियों की मांग का सम्मान करते हुए बुंदेलखंड राज्य निर्माण का रास्ता प्रशस्त करेंगे ।

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