खुद को बचपन से ही कलाकार समझा : तृषिका त्रिपाठी

धर्मेन्द्र साहू

मुम्बई। मैं बचपन से ही अपने आपको एक कलाकार के रूप में देखती थी। कलाकारों की लाइफ स्टाइल और उनके इंटरव्यू देखकर लगता था कि टीवी में उन कलाकारों की जगह मैं ही बैठी हॅूं  । इसका परिणाम ये ही हुआ कि मैं आज एक कलाकार हॅूं  और अपने काम से पूरी तरह संतुष्ट हॅूं । ये बात कही प्रसिद्ध अभिनेत्री तृषिका त्रिपाठी ने ।
इन दिनों मशहूर टीवी सीरियल ‘चिड़ियाघर’ में चुहिया का किरदार निभा रहीं तृषिका त्रिपाठी लखनऊ की रहने वालीं हैं । बचपन में इनकी मां चाहती थीं कि ये डॉक्टर बने जबकि पिताजी दिनकर तिवारी चाहते थे कि आई.ए.एस. अधिकारी बने लेकिन तृषिका तो अपने आपको एक कलाकार मानती थीं। खास रिपोर्ट डॉट कॉम से एक मुलाकात के दौरान तृषिका ने बताया कि वे जब बच्ची थीं तो अपने घर की छत पर एक मिरर ले जाती थी और उसमें अपने आपको देखकर एक्ट्रेस की तरह अभिनय करतीं । यहां तक कि टीवी पर आने वाले कलाकारों में वे अपना ही रूप देखतीं। संयोग से लखनऊ में एक शूटिंग देखने गये तो हीरोइन की बहन का छोटा सा रोल करने का मौका मिल गया । तृषिका ने बताया कि पहली बार कैमरा फेस करते वक्त मुझे एक बार भी डर नहीं लगा बल्कि आत्मविश्वास और बढ़ गया क्योंकि मुझे लगा कि मैं तो इसी के लिए बनी हूँ ।
उन्होंने बताया कि पैरेंटस ने भी मेरे अंदर छुपे कलाकार को दबाया नहीं और प्रोत्साहित किया । तृषिका ने बताया कि वे 13 साल पहले इस इंडस्ट्री में आईं तब पैरेंटस ने बोला था कि मुम्बई में कोई परेशानी हो तो बताना लेकिन मैंने परेशानियों को फेस किया पैरेंटस को बताया नहीं क्योंकि यदि बताती तो वापस लखनऊ लौटना पड़ जाता ।
कला के प्रति समर्पण और आत्मविश्वास के बल पर तृषिका को यहां काम मिलना शुरू हुआ। डीडी के एहसास और दहलीज जैसे शो में अच्छी भूमिका के बाद संतान, झांसी की रानी ,नन्हीं परी, गीत हुई सबकी पराई , ब्याह हमारी बहू का, फुलवा, लापता गंज आदि कई मशहूर सीरियलों में तृषिका ने अपने अभिनय से नाम रोशन किया है। पिछले कई सालों से वे सब टीवी के प्रसिद्ध सीरियल ‘चिड़ियाघर’ में ‘चुहिया’ की भूमिका निभा रही हैं। बच्चों को चुहिया का ये किरदार बहुत पसंद है। तृषिका ने बताया कि चिड़ियाघर में काम करने का अनुभव शब्दों में बयां नहीं कर सकती क्योंकि ये हमारे एक परिवार की तरह बन गया है।
उन्होंने कहाकि इंडस्ट्री में आये तो खुद का आत्मविश्वास, ईश्वर का भरोसा और भाग्य साथ आया। पैरेंटस का सपोर्ट तो पहले से था ही शादी के बाद पति का भी खूब सहयोग मिलता है। उन्होंने बताया कि काफी पहले दो फिल्मों में रोल किया है लेकिन यदि अच्छे ऑफर मिलते हैं तो फिर से फिल्में करूंगी।
तृषिका ने बताया कि जब मुम्बई आईं तो बहुत छोटी थीं लेकिन उनके पास एक विजन था तो सफलता प्राप्त हुईं लेकिन कुछ नये कलाकार थोड़ी सी असफलता से डर जाते हैं और डिप्रेस हो जाते हैं जबकि यदि टारगेट लेकर मेहनत की जाये तो देर-सबेर सफलता मिलती है, लेकिन यदि एक उम्र में केवल इसी पर आश्रित होकर आये हैं तो कुछ अन्य विकल्प भी खुले रखने चाहिये ताकि बाद में डिप्रेसन की नौबत ही न आये। बाकि मुस्कराते हुये लाइफ को एंजॉय करिये तो किस्मत भी साथ देती है।

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