कई विधाओं में पारंगत हैं जयकरन निर्मोही

(आबिद खान)
झांसी। रंगमंच से लेकर फिल्मी दुनिया तक का सफर करने वाले जयकरन निर्मोही बुंदेलखंड के एक ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने न केवल अभिनय के क्षेत्र में बल्कि गायन, वादन, प्रोडक्शन और यहां तक कि कॉस्टयूम डिजाईनिंग में भी महारथ हासिल की है। यहां की लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिये जयकरन निर्मोही सतत रचनात्मक कार्य करते रहते हैं।
झांसी के रहने वाले जयकरन निर्मोही अपना गुरू अपने पिताजी स्व.किशनलाल जी को मानते हैं। निर्मोही ने बताया कि पिताजी के मार्गदर्शन में ही उन्होंने लोकसंगीत की साधना की । अब तक वे 56 सौ से अधिक गीत, गज़ल, कब्बाली और भजन लिख चुके हैं। रंगमंच पर अभिनय का शौक बचपन से ही रहा है जो आज तक जारी है। सम-सामायिक विषयों पर नुक्कड़ नाटकों का मंचन समय-समय पर निर्मोही करते रहते हैं।
बुंदेलखंड के राई, सैरा, ढिमरयाई, कछियाई विदाई आदि गीत व नृत्य में जयकरन निर्मोही को निपुणता प्राप्त है। इन गीतों पर नृत्य और संगीत का कुशल निर्देशन वे करते हैं। ‘किसने भरमाया मेरे लखन को’ फिल्म के लिये निर्मोही ने गीत लिखे हैं। ‘प्रथा’ फिल्म की प्रोडक्शन टीम को वे हिस्सा रहे हैं। निर्देशक मणिरत्नम की फिल्म ‘रावण’ में इन्होंने कंडक्टर की भूमिका निभाई है साथ ही फिल्म के कॉस्टयूम डिजाईनिंग में भी सहयोग किया है। निर्मोही बताते हैं कि कॉस्टयूम डिजाईनिंग उन्होंने अपने भाई से सीखी है। फिल्म ‘बहुरूपिया’ में इन्होंने इन्द्र का रोल किया है। राजा बुंदेला निर्देशित ‘एलिक्स हिन्दुस्तानी’ फिल्म में निर्मोही दरोगा के रूप में नजर आयेंगें।
आजतक चैनल के नाटय रूपांतरण शो ‘मर्दन सिंह’ में इन्होंने राजा की भूमिका निभाई। ईटीवी उत्तर प्रदेश के ‘फोक जलवा’ शो में इनका चयन 170 कलाकारों के बीच किया गया था । इस शो ने काफी लोकप्रियता हासिल की थी। इन सबके अलावा निर्मोही बुंदेलखंड के लोक देवताओं पर आधारित रीति-रिवाजों की जानकारी रखते हैं।
जयकरन निर्मोही का कहना है कि बुंदेलखंड की लोककलाओं का कोई मुकाबला नहीं है। ये अलग बात है कि इसे भोजपुरी, राजस्थानी और पंजाबी जैसी कलाओं की तरह प्रोत्साहन नहीं मिला। यहां एक से बढ़कर एक लोक कलाकार हैं लेकिन उन्हें मंच नहीं मिलता जहां वे अपनी कला का प्रदर्शन कर पायें और यही कारण है कि यहां का कलाकार स्थानीय स्तर तक ही सीमित रह जाता है। निर्मोही कहते हैं कि शासन-प्रशासन को चाहिये कि बुंदेलखंड की लोकसंस्कृति और यहां के कलाकारों को प्रोत्साहित करें और इस कार्य के लिये मैं हरसंभव सहयोग के लिये तत्पर हॅूं क्यांकि मातृभूमि की सेवा अपना धर्म है।

 

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