थियेटर को एक्टिंग की जान मानती हूॅं : मुक्ता चडढा

धर्मेन्द्र साहू
मुम्बई। थियेटर केवल कला नहीं सिखाता बल्कि इंसानियत का पाठ भी पढ़ाता है। मैं मानती हॅूं कि थियेटर एक्टिंग की जान होती है। ये कहना है फिल्म कलाकार मुक्ता चडढा का।
श्रीराम सेंटर दिल्ली से पास आउट मुक्ता चडढा ने अब तक कई थियेटर प्ले किये हैं। उन्हें टेलीविजन और फिल्मों में काम करने की ललक 2009 में मुम्बई खींच लाई और फिर यहां शुरू हुआ संघर्ष का दौर। हालांकि मुम्बई में मुक्ता ने दो साल तक एक प्रोडक्शन हाउस में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में नौकरी की साथ ही एक्टिंग के लिये प्रयास करती रहीं। स्टार प्लस के सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है, सावधान इंडिया, जीटीवी के मेरी सासो, डीडी किसान के धरती की गोद में आदि सीरियलों में मुक्ता ने कई एपिसोड किये हैं।
गेय लोगों पर बनी बेव सीरीज सेक्शन 377 में मुक्ता ने मुख्य भूमिका निभाई है। मशहूर रंगकर्मी जाकिर हुसैन के साथ थियेटर करने का अनूठा अनुभव उन्हें है। आने वाले दिनों में वे कुछ फिल्में करने वाली हैं। हालांकि मुम्बई में भी वे लगातार थियेटर प्ले करती हैं।
मुक्ता ने बताया कि वे थियेटर को एक्टिंग की नींव मानती हैं। थियेटर केवल एक्टिंग ही नहीं बल्कि इंसानियत का पाठ भी पढ़ाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में आप देख लो जो एक्टर थियेटर के जरिये आये हैं उनकी सोच सकारात्मक ही होती है और अभिनय जगत में उसका अलग स्थान होता है।

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