‘भाभीजी घर पर हैं’ की सफलता ईमानदार प्रयास का ईश्वरीय फल : शशांक बाली

धर्मेन्द्र साहू
मुंबई। मशहूर टेलीविजन शो ‘भाभी जी घर पर हैं’ और हाल ही में शुरू हुये शो ‘जीजा जी छत पर हैं’ के डायरेक्टर शशांक बाली का कहना है कि सफलता-असफलता आपके हाथ की बात नहीं बस आपको तो निष्काम कर्म करते रहना है। उन्होंने कहाकि जिनके अंदर टेलेण्ट है और जिन्हें अपने काम को करने में मजा आता है भगवान की कृपा उन पर हो ही जाती है।
खास रिपोर्ट डॉट कॉम से बातचीत करते हुये डायरेक्टर शशांक बाली ने ‘भाभी जी घर पर हैं’ की सफलता का श्रेय ईश्वरीय कृपा, इसकी पूरी टीम और दर्शकों को दिया। उन्होंने बताया कि सब्जी चाहे तोरई की हो या लौकी की, जब उसमें मसाले ज्यादा डाल दिये जाते हैं तो वो भी बदहजमी का कारण बन जाती है ऐसे ही कॉमेडी भी है। फूहड होने से उसका रूप विकृत हो जाता है। हमने अपने शो में संतुलित कॉमेडी करने का प्रयास किया है
अपने सरल स्वभाव और मृदु वाणी के धनी शशांक बाली ने बेबाकी से बताया कि ‘भाभीजी घर पर हैं’ के दो कैरेक्टर को एक-दूसरे की बीबी के प्रति आकर्षण हैं। जिसे एक सामाजिक बुराई कहा जा सकता है लेकिन खास बात ये है कि दोनों अपनी बीबीयों से भी बेहद प्यार करते हैं। इसी आकर्षण को कॉमेडी के रूप में परोसकर दर्शकों का मनोरंजन करने का प्रयास हमनें किया है और ईश्वर की कृपा है कि इस शो को दर्शक उम्मीद से ज्यादा पसंद कर रहे हैं। दो साल के बच्चे से लेकर 80 साल के वृद्ध तक को ये शो हंसा रहा है।
मूलरूप से लखनऊ के रहने वाले शशांक बाली के पिताजी वी.एन.बाली मशहूर लेखक हैं। उन्होंने फारूख शेख के चमत्कार शो लिखा है। शशांक 23 वर्ष की उम्र में निर्देशन के क्षेत्र में आये और उनका पहला शो ‘एफ.आई.आर.’ था जो लगभग 9 वर्ष तक चला लेकिन उनके शो ‘भाभीजी घर पर हैं’ ने उन्हें बुलंदियों तक पहुंचा दिया।
हाल ही में शुरू हुये शो ‘जीजाजी छत पर हैं’ का निर्देशन भी शशांक बाली कर रहे हैं। मजे की बात ये है कि ये शो भी शुरूआती दिनों से ही दर्शकों को पसंद आने लगा है। इस शो में दो टीन एजर लड़कियों की कहानी को कॉमेडी के रूप में पेश किया जा रहा है। शशांक कहते हैं कि व्यक्ति जब अपने को कर्ता मान बैठता है तभी परेशानी में पड़ता है। उन्होंने कहाकि करने कराने वाले ईश्वर हैं बस हमें ईमानदार बने रहना है। उन्होंने कहाकि जिनके अंदर टैलेण्ट है और जिन्हें अपने काम में मजा आता है वे ही इस इंडस्ट्री में आयें । सिर्फ पैसे और शोहरत के लिये आयेंगें तो खो जायेंगें। ये जरूर है कि ईमानदारी से काम करेंगें तो ईश्वर सफलता भी देंगें।

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