कलाकारों को तराशा जाता है थियेटर में : शैलजा सिंह

(धर्मेन्द्र साहू)
मुम्बई। उत्तराखंड के पहाड़ों की सोंधी खुशबू, पहाड़ी हवाओं की ठंडी बयार और गढ़वाली लोक संस्कृति के बीच शैलजा के पैर कब नृत्य के लिए थिरक उठे उसे मालूम ही नहीं पड़ा।
पुस्तकों से बेहद लगाव रखने वाले  देहरादून निवासी गजेंद्र सिंह भदौरिया और श्रीमती विजय लक्ष्मी के घर पैदा हुई शैलजा को अपनी सांस्कृतिक विरासत से बचपन से ही प्यार है। उनके माता-पिता ने उनकी इस रूचि को समझा और उन्हें कत्थक नृत्य का प्रशिक्षण दिलाया और शैलजा जल्द ही कत्थक में पारंगत हो गईं।
शैलजा ने एलएलबी की पढ़ाई लखनऊ से की है। इस दरम्यान वे लखनऊ के प्रसिद्ध जोश थियेटर ग्रुप से जुड़ गईं। ग्रुप के फाउंडर प्रवीन चंद्रा ‘पीसी’  के मार्गदर्शन में उन्होंने अभिनय में प्रवीणता हासिल की।
प्रसिद्ध रंगकर्मी गिरीश कर्नाड के प्ले ‘तुम्हारे लिए’ में और ‘बेगम हज़रत महल’ में शैलजा ने बेहतरीन अभिनय किया। ‘माउस ट्रेप’ और ‘हयवदन’  जैसे शो में भी शैलजा का अभिनय सराहनीय रहा।
शैलजा को उनके अभिभावकों का लगातार प्रोत्साहन मिला है जिसके चलते अब वे अभिनय के लिए मुम्बई आई हैं। शैलजा का कहना है कि उनका इंट्रेस्ट आर्ट मूवीज की ओर ज्यादा है। इसलिये प्रयास है कि आर्ट से रिलेटिड रोल फिल्म या टीवी सीरियल में उन्हें मिले। शैलजा ने बताया कि वे थियेटर को कला की जान मानती हैं क्योंकि यहाँ कलाकारों को तराशा जाता है, हालांकि थियेटर से आप पैसा नहीं कमा सकते लेकिन इससे कला का ऐसा हुनर सीखते हैं जो आपको एक मंझा हुआ कलाकार बनाता है।
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